परत दर परत सी ज़िंदगी

मंजुला श्रीवास्तवा, प्रसिद्ध साहित्यकार,

परत दर परत सी ज़िंदगी,
कुछ चीन्ही, कुछ अनचीन्ही सी,
कुछ अनुभूत तत्व कथ्य सी,
कुछ परिधि में, कुछ परिधि से बाहर,
कुछ कही, कुछ अनकही सी।
परत दर परत सी ज़िंदगी,
क्या कहूँ, किससे कहूँ।

एक वो जो हम हो नहीं पाए,
या तुमने होने नहीं दिया।
एक मानचित्र जो नक्शे में है,
और एक जो तलुओं और हथेलियों में है।
एक सफर में और एक सफर के मुहाने पर,
परत दर परत सी ज़िंदगी,
क्या कहूँ, किससे कहूँ।

एक वो जो सारांश है,
और एक वो जो सारांश के भी बाद है।
एक साथ-साथ है,
और एक वो जो क्षितिज से भी परे है।
सात रंगों में समाई ज़िंदगी,
परत दर परत सी ज़िंदगी,
क्या कहूँ, किससे कहूँ।

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