
महेश प्रसाद शर्मा, प्रसिद्ध साहित्यकार, बरेली (मध्यप्रदेश)
बीज बोया, फल मिलेगा,
आज नहीं, यह कल मिलेगा।
धैर्य का प्रतिफल मिलेगा।
धैर्य से सब काम बनते।
पक्षी धीरे-धीरे नीड़ बुनते।
धीरे-धीरे मिले मंजिल,
वक्त में शामिल है हर पल।
उन पलों को पास रख तू,
गंतव्य में ही हल मिलेगा।
धैर्य का प्रतिफल मिलेगा।
2.
काली, अंधेरी रात हो,
दिखता न तब निज हाथ हो।
संकल्प लाता तब सबेरा,
धैर्य ऐसा गुण है तेरा।
एक आशा का दिया तब,
रात भर ही तो जलेगा।
धैर्य का प्रतिफल मिलेगा।
3.
एवरेस्ट चढ़ना है मुश्किल,
लेकिन नहीं असंभव है।
धीरे-धीरे चढ़ते जाते,
तब होता यह संभव है।
समय, लगन और कर्म लगेगा,
धैर्य का प्रतिफल मिलेगा।
4.
हर काम का अभ्यास करना,
मुश्किलों से न तू डरना।
अर्जुन जैसे बनो धीर,
समरांगण में सहो पीर।
विजय-पुष्प तब ही खिलेगा,
धैर्य का प्रतिफल मिलेगा।
5.
मानवीय मूल्यों को जानो,
और धैर्य की चादर तानो।
धीरे-धीरे लक्ष्य पाओगे,
गीत उन्नति के गाओगे।
कमीज़ तुम्हारी समय सिलेगा,
धैर्य का प्रतिफल मिलेगा।
सही सटीक विचार लेखन
सुन्दर रचना