कहते हैं… चाँद में दाग़ होता है।
अजी…!! मानव भी कहाँ संपूर्ण होता है।
कमियाँ तो बेशुमार होती हैं… सभी में,
मगर बदनाम केवल चाँद ही होता है।
ज़रा खूबसूरती तो उसकी देखिए,
उसके गुणों को भी तो ज़रा आंकिए।
चाँदनी से अपनी कर देता है रौशन,
तिमिर को भी काट देता है… चाँदनी से।
पूर्णमासी की छटा देखते ही बनती है,
चारों ओर चाँदनी ही नज़र आती है।
उस अमावस की रात को तो देखिए,
जब तरस जाती है… चाँदनी के लिए।
आसमान में कितना सुंदर सा लगता है,
आसमान भी कितना प्यारा सा दिखता है।
ये चाँद किसको दाग़दार दिखता है?
अपने गिरेबान में भी जरा झाँकर तो देखो,
हमारा सारा दामन ही दाग़दार दिखता है…!!

अनीता अरोड़ा, प्रसिद्ध लेखिका, लखनऊ