
मेघा अग्रवाल, प्रसिद्ध लेखिका, नागपुर (महाराष्ट्र)
हे कृष्ण तुमको क्या कहूं मैं …
तुम ज्ञान तुम विज्ञान , तुम जीवात्मा के प्राण हो।
तुम ही गीता तुम ही वेद, तुम ही तो उपदेश हो । ।
हे कृष्ण …
तुम कविता तुम सरिता, तुम ही सागर में विलीन हो।
तुम ही पेड़ तुम ही पौधे , तुम धरा की मुस्कान हो।।
हे कृष्ण …
तुम ही काल तुम विक्राल, तुम भुत भविष्य वर्तमान हो।
तुम ही शब्द तुम ही भाव’ तुम प्रेरणा स्रोत हो।।
हे कृष्ण …
तुम प्रेम तुम अग्नि, तुम ही विरह की पीड़ा हो।
तुम ही दवा तुम ही मरहम, तुम ही खुशियों की गठरी हो।।
हे कृष्ण …
तुम ही वीणा तुम ही वाणी, तुम ही मधुर गान हो।
तुम ही भजन तुम ही किर्तन, तुम ही धर्म कारक हो।।
हे कृष्ण …
तुम ही शरीर तुम ही प्राण, तुम पुरा संसार हो।
तुम ही माया तुम ही जाया, तुम ही तारण हारा हो।।
हे कृष्ण …
बहुत सुंदर अध्यात्म से ईश्वर के सानिध्य को समर्पित सृजन