कर्म की सीख…

सफलता आस्था को और प्रबल कर देती है . पंडित जी ने दोनों के जन्मांक देखें और पहले लड़के से कहा – कि वह इस बार अवश्य अधिकारी बन जाएगा और दूसरे लड़के से कहा- तुम्हारे ग्रह नक्षत्र कमजोर हैं, इसलिए तुम्हें किसी अन्य व्यवसाय पर ध्यान देना चाहिए.
१० वर्ष की आस्था भविष्य के आकलन को समझ नहीं पाती, परंतु वह दादा से कहती है कि मेरे विद्यालय में यह बताया जाता है, कि परिश्रम से भाग्य बनता है .आप सभी को परिश्रम से विमुख क्यों कर रहे हो?
परंतु दादाजी उसको डांट कर चुप कर देते हैं्. पूजा पाठ के कार्य से निवृत होकर वह घर आती है, तो नर्सरी से दो आम के पौधे भी खरीद लेती है और अपने खेत में दादाजी के साथ लगवाने जाती है.
दादाजी कहते हैं फलदार वृक्ष लगाना बहुत अच्छा कर्म होता है.तो आस्था कहती है दादाजी! मेरे इन वृक्षों का भविष्य भी बता दीजिए . मुझे यह बताइए इन दोनों पौधों में से किस पौधे का आम मीठा होगा और किस पौधे का आम खट्टा होगा. दादाजी कहते हैं यह कैसे संभव है, पहले तुम इन दोनों पौधों की खूब सेवा करो! समय पर पानी और कंपोस्ट डालो! फिर जब यह बड़े हो जाएंगे, तब इन पर फल आएंगे. तभी पता चलेगा कौन सा फल मीठा है और कौन सा खट्टा. अगर तुम्हें अभी पता चल गया तो तुम खट्टे फल वाले पौधे की देखभाल नहीं करोगी, और उससे विमुख हो जाओगी.
दादाजी! यही तो मैं आपको बताना चाहती थी. कि आपने जिस लड़के को अधिकारी होने की भविष्यवाणी की है, वह अपने परिश्रम से विमुख हो जाएगा. और जिस लड़के को असफल होने की भविष्यवाणी की है, वह अधिक परिश्रम करेगा अथवा निराश होकर अध्ययन करना ही बंद कर देगा. अतः भविष्यवाणी के परिणाम विपरीत भी हो सकते हैं. दादा जी आस्था की बुद्धिमत्ता और तर्क से निरुत्तर हो गए और आस्था को वचन दिया कि वह अब भविष्यवाणी करते समय कर्म करने की सीख अवश्य देंगे .

गीता कटियार, शिक्षिका एवं प्रसिद्ध लेखिका, कानपुर

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