
अनामिका मिश्रा
हमारी मातृभाषा देश का सम्मान है हिंदी,
बसा है प्रेम हिंदी में, स्वरों की तान है हिंदी।
मधुरतम शब्द हैं इसके, अलंकृत पंक्तियाँ लगतीं,
लगे बागेश्वरी मां का हमें वरदान है हिंदी।
सरस लय से सजे हर वाक्य जो छूते हृदय को हैं,
बहुत ही कर्णप्रिय, सोहित सुरीला गान है हिंदी।
हमारा आवरण है ये, हमारी सभ्यता इसमें,
सरलतम आचरण अपनी बनी पहचान है हिंदी।
अधर पर शोभती भाषा, चरित्र को भी निखारती,
हमारे देश की बोली, सदा अभिमान है हिंदी।
बिना इसके अधूरा ज्ञान होगा, जो नहीं समझे,
बताओ विश्व को सब मिल, हमारी शान है हिंदी।
रटे जिह्वा सदा हिंदी, ‘अना’ रखना इसे ऊपर,
हमारी राष्ट्रभाषा ये, हमारी मान है हिंदी।