केदारनाथ यात्रा के बाद ही मन अमरनाथ की ओर खिंच चला था.
हिमालय की विशाल, शांत और रहस्यमयी गोद में जो आत्मिक सुकून मिला था, वह अब एक बार फिर उसी ओर बुला रहा था. देवों के देव, भोलेनाथ का आशीर्वाद और प्रकृति की गोद में कुछ दिन यही संकल्प लेकर हमने अमरनाथ यात्रा की योजना बनाई.

प्रस्थान की घड़ी
हमारी यात्रा की शुरुआत नागदा से हुई. दिन था 9 जुलाई 2024. इंदौर से जम्मू के लिए रात 2:15 बजे हमारी 3 ट्रेन थी. संयोगवश, लगभग पूरा डिब्बा अमरनाथ यात्रियों से भरा था. भक्ति और उत्साह का माहौल सजीव था. रात 8:55 पर हम जम्मू स्टेशन पर उतरे.
20 वर्षों के बाद उस स्टेशन को देखना एक भावुक क्षण था. सबसे पहले हमने वहां कार्ड सेंटर की खोज की, जो स्टेशन के समीप ही था. उसका खुलने का समय सुबह 4 बजे था. तब तक हमने दो पोस्टपेड सिम खरीदीं, जो 10 मिनट में एक्टिव हो गईं. अब हमारे पास यात्रा के दौरान एक-दूसरे से जुड़े रहने का साधन भी था.
हल्का फुल्का भोजन लेकर हम सेंटर के पास बने पंडाल में सो गए. सुबह 3 बजे से ही लाइन लगना शुरू हो गई थी. हम भी उस पवित्र लाइन में लग गए. सेंटर खुला और आधे घंटे में हमारे कार्ड बन गए. कार्ड में हमारी फोटो सहित सारी जानकारी डिजिटल रूप में दिखाई दे रही थी यह एक अद्भुत अनुभव था.
भगवती नगर बेस कैंप, जम्मू: जहां से यात्रा आरंभ होती है

10 जुलाई की सुबह चाय-नाश्ते के बाद हम ऑटो से भगवती नगर बेस कैंप की ओर निकले. रास्ते में बारिश ने जोरदार स्वागत किया जैसे आकाश भी हमारे इस पावन संकल्प में सम्मिलित हो रहा हो. ऑटो चालक ने एक पुल के नीचे हमें रोक कर भीगने से बचाया, पर आधे हम पहले ही भीग चुके थे.7:30 बजे कैंप के गेट खुले. अंदर प्रवेश करते ही सुरक्षा की कड़ी व्यवस्था ने हमें आश्वस्त किया. कार्ड को स्कैनर के सामने रखते ही स्क्रीन पर हमारी पूरी प्रोफाइल दिखाई दी यात्रा का आधुनिक और व्यवस्थित स्वरूप देख मन प्रसन्न हो गया.

कैंप का वातावरण एकदम होटल जैसा था, पर सुरक्षा में तैनात जवानों और हर कोने में फैली व्यवस्था ने इसे एक अनुभव बना दिया. हमने वेटिंग हॉल का टिकट लिया (50 प्रति व्यक्ति) और पहलगाम रूट के लिए बस टिकट भी (404 प्रति व्यक्ति). हमारी बस थी पी-12 (यह पहलगाम रूट का संकेत है, जबकि बालटाल का होता है). हॉल में एक बढ़िया कोना मिल गया. 30 प्रति व्यक्ति के हिसाब से गद्दा, तकिया और चादर मिल गई. हमने स्नान किया और यात्रा की थकान उतारने के लिए कुछ घंटे विश्राम किया.
भक्ति और भंडारे: सच्ची सेवा
कैंप परिसर में दिल्ली की दो संस्थाओं द्वारा संचालित भंडारे लगे थे, जहां सुबह और शाम का भोजन निशुल्क मिलता था. सात्विक भोजन, सेवाभाव और वहां की गरिमा यह अनुभव आज भी मन को छू जाता है.

सुनील परिहार, ट्रैवलर (महिदपुर रोड, उज्जैन)