
डॉ.रश्मि, प्रसिद्ध इतिहासकार एवं लेखिका, मुंबई
कितने रिश्तों से गुजर कर देखा है।
हर रिश्ता “अजब-गजब” देखा है।
दिलों जान से मरने वालों को सीने में खंजर उतारते देखा है।
जो सीना चौड़ा करके सामने आ जाया करते थे “महफ़िलों” में,
उन्हीं को पीठ पर वार करते हुए देखा है।
रात भर चादर की सिलवटों को और सुबह उसी चादर को सीधा देखा है।
जिसकी बेरुखी सह न जाए, उसी के दामन से लिपटते देखा है।
जो ताउम्र ज़ख्म-जख्म देते गए,
उन्हीं के कंधों पर सिर रखकर रोते हुए देखा है।
यह वही “कातिल” आदम है, जिन्हें जान-जान कहते हुए देखा।
आते हैं जिंदगी में बहारों का मौसम लेकर,
हमने अक्सर ऐसे लोगों को ‘विरानियां’ देते हुए देखा।
शुभ विचार