मंज़िल मिल ही जाएगी

डॉ. शशिकला पटेल (असिस्‍टेंट प्रोफेसर आर. आर. एज्‍युकेशनल ट्रस्‍ट बी. एड. कॉलेज मुलुंड पूर्व ), मुंबई

मंज़िल मिल ही जाएगी, निरंतर प्रयास से,
कदम-कदम बढ़ाए जा, पूरे विश्वास से।

कश्तियों में छेद है, तो कोई ग़म नहीं,
मौजों में है रवानी, हौसला भी कम नहीं।
साहिल भी होगा हासिल, हिम्मत-ए-आस से,
मंज़िल मिल ही जाएगी……

तिमिर में हैं छाए हुए, अनेक मकड़-जाल,
जकड़ न लें ये पाश में, ख़ुद को तू संभाल।
जज़्बे की शमा जला, निकल मोह-पाश से,
मंज़िल मिल ही जाएगी……

तिनका-तिनका जोड़ बनाते हैं जो घोंसला,
आँधियों में भी कभी, खोते नहीं वो हौसला।
मुश्किलों को देख, न तुम रहो हताश से,
मंज़िल मिल ही जाएगी……

ज्यों काम सुई का, कर न सके तलवार,
डूबते को तिनका भी, बन जाता पतवार।
मिलना सदा मोहब्बत से, आम-ख़ास से,
मंज़िल मिल ही जाएगी……

मेहनत की चाबी से, खुलते हैं सभी ताले,
बहता जब स्वेद, आते परिणाम भी निराले।
जड़मति होय सुजान, करत अभ्यास से,
मंज़िल मिल ही जाएगी……

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