छप्पन भोग और खाटू श्याम दरबार ने बांधा श्रद्धालुओं का मन

श्रीमद् भागवत कथा के पंचम दिवस का आयोजन आज अत्यंत भक्तिमय, उल्लासपूर्ण और आध्यात्मिक चेतना से परिपूर्ण वातावरण में संपन्न हुआ। कथा स्थल श्रद्धालुओं की भारी उपस्थिति से गुंजायमान रहा। हर ओर “श्रीकृष्ण” नाम का संकीर्तन, भक्ति गीतों की मधुर ध्वनि और श्रद्धा की तरंगें वातावरण को पावन बना रही थीं।

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मुझे ज़िंदगी में तिजारत करना नहीं आया

जिसे जीवन में तिजारत नहीं, इंसान बने रहना सिखाया गया। पिता की सुरक्षा-केंद्रित सोच, मेले की छोटी-सी नौकरी और पहला व्यापारिक असफल अनुभव सब मिलकर यह बताते हैं कि हर हार नुकसान नहीं होती, कुछ हारें मनुष्यता बचा लेती हैं।

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मंजिल

अकेलेपन और मार्गदर्शन की खोज का भावपूर्ण वर्णन है। लेखक अपने जीवन में उस पल का अनुभव कर रहा है जब न खुद की दिशा स्पष्ट है, न किसी और का ठिकाना। वह मंजिल और साथी की तलाश में अकेले खड़ा है, उम्मीद करता है कि कोई आए और उसे नए मार्ग की ओर ले जाए। यह एक आत्मान्वेषण और साथी की आवश्यकता की कविता है, जो जीवन में खोए हुए मार्ग और मिलने वाली नई मंजिल की प्रतीक्षा को उजागर करती है।

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लव यू….टेक केयर

शायद तुम्हें लगता है… मैं मज़ाक करता हूँ, छेड़ता हूँ… पर सच्चाई ये है… मैं खुद को तुम्हारे शब्दों में सहेज कर रखता हूँ। मैं तुम्हारे दोस्त में माँ की ममता पाता हूँ, बहन की फिक्र पाता हूँ… और दिल के किसी सबसे कोमल कोने में एक ऐसी प्रेमिका का एहसास करता हूँ… जो कभी मिली नहीं, पर हमेशा पास रही।”

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बेंगलुरु में सावन मिलन महोत्सव धूमधाम से सम्पन्न

सिद्धार्थ सांस्कृतिक परिषद, आरटी नगर, बेंगलुरु की महिला शाखा द्वारा सावन मिलन महोत्सव अत्यंत धूमधाम एवं हर्षोल्लास के साथ सम्पन्न हुआ। यह कार्यक्रम बिहार भवन, बेंगलुरु में आयोजित किया गया।

कार्यक्रम की अध्यक्षता अमिता झा जी ने अत्यंत सौंदर्यपूर्ण ढंग से की। कार्यक्रम में उपाध्यक्ष ऊषा झा और डॉ. अर्चना झा एवं बिंदु सिंह जी ने सक्रिय भागीदारी निभाई। सचिव डेज़ी शर्मा और अपर्णा शर्मा की भी उत्साहपूर्ण सहभागिता रही। समिति की कोषाध्यक्ष निधि शर्मा तथा सदस्य हीरा झा और शीला सिंह ने भी आयोजन को सफल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

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पापा का क्यूट कंफ्यूज़न

इंटरनेट पर हाल ही में एक वीडियो वायरल हुआ जिसमें एक पिता और बेटी का छोटा-सा पल लाखों चेहरों पर मुस्कान बिखेर रहा है. वीडियो में बेटी ट्रेन की खिड़की से अपने पापा को कोरियन फिंगर हार्ट बनाकर प्यार जता रही होती है. लेकिन भारतीय पिता तो पिता होते हैं… सीधे समझ बैठे कि शायद बेटी पैसे मांग रही है..

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RailOne ऐप से यात्रियों को मिलेगा कैशबैक और सुविधा

पश्चिम रेलवे का डिजिटल टिकटिंग अभियान मुंबई।पश्चिम रेलवे ने यात्रियों को RailOne ऐप के माध्यम से डिजिटल, त्वरित और कैशलेस टिकटिंग अपनाने के लिए एक व्यापक जन-जागरूकता एवं प्रचार अभियान शुरू किया है। इसका उद्देश्य यात्रियों की सुविधा बढ़ाना और यात्रा को अधिक सुगम बनाना है। RailOne ऐप एक एकीकृत मोबाइल प्लेटफॉर्म प्रदान करता है,…

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खामोशी का बोलता सफर

बीस साल बाद एक ट्रेन के कंपार्टमेंट में हुई ये आकस्मिक मुलाकात जहाँ न शब्द थे, न शिकायते सिर्फ वही पुरानी खुशबू, वही मोहब्बत और दो लोगों के बीच पसरी खामोशी, जो बोलती तो थी… मगर सिर्फ दिलों में

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स्वयंसिद्धा

ब्रह्मपुत्र के किनारे बैठी मैं अपने भीतर के तूफ़ानों को सुन रही थी। एक युवक आया और बोला. “कितनी भव्य है ये नदी।” मैंने कहा “हाँ, पर इसे बहने के लिए गिरना, टूटना पड़ा है। इसी टूटने में इसकी पहचान है।”

मैंने अपने हाथों को देखा — हर झुर्री जैसे किसी मोड़ का निशान। बोली — “हर औरत के हिस्से में भी एक नदी होती है, जो बहती है, कभी बाढ़ बनती है, कभी शांत, लेकिन अंत में अपने सागर तक पहुँच जाती है।” वो चुप रहा, बस मुझे ऐसे देखा जैसे कोई नदी को देखता है। अब वो मुझसे अपने उत्तर खोजता है, और मैं मुस्कुरा देती हूँ क्योंकि जवाब किताबों में नहीं, नदियों में बहते हैं। मैं स्वयंसिद्धा हूँ. अपने भीतर के ब्रह्मपुत्र को स्वीकार कर चुकी हूँ। अब मुझे कहीं पहुँचना नहीं, बस बहते रहना है।

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दीवार

कहानी एक सफल लेकिन अकेले हो चुके इंसान— रविन्द्र के दर्द को दिखाती है। महंगे बंगले, नाम, शोहरत और पैसा होने के बावजूद वह अंदर से टूट चुका है, क्योंकि उसकी माँ अब नहीं रही। उसने माँ से वादा किया था कि उसे हर सुख देगा, पर उसी “बड़े मकान की दीवारों” ने बेटे और माँ के बीच दूरी बना दी। माँ शायद आख़िरी वक़्त में दर्द में थी, पर रविन्द्र को पता न चला क्योंकि “दीवारों” ने आवाज़ और अहसास रोक लिए।रविन्द्र आज पछता रहा है कि असली घर प्यार और साथ से बनता है, दीवारों से नहीं।यही दर्द और पछतावा पूरी कहानी का मूल है।

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