महिदपुर रोड का पहला जलसा: चटर्जी नाइट

साल 1980 का महिदपुर रोड, गलियों में हलचल थी और हर कोई पहले बड़े जलसे “चटर्जी नाइट” की तैयारियों में व्यस्त। यह जलसा प्रिय शिक्षक स्व. कपूर साहब की स्मृति में आयोजित किया गया था। मंच की कमी के बावजूद विद्यार्थियों ने खाली ड्रम और लकड़ी के स्लीपर से एक शानदार मंच तैयार किया। जब प्रभात चटर्जी और उनका आर्केस्ट्रा मंच पर आए, तालियों और उत्साह की गूँज में पूरा महिदपुर रोड मंत्रमुग्ध हो गया। यह केवल संगीत का आयोजन नहीं, बल्कि श्रद्धा, समर्पण और जुनून की मिसाल बन गया।

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भक्ति और श्रद्धा के सागर में डूबा नगर

नगर में आध्यात्मिक उल्लास और भक्ति की अनुपम छटा देखने को मिली, जब श्रीराम हनुमान मंदिर सेवा समिति के तत्वाधान में श्रीमद् भागवत कथा का शुभारंभ भव्य कलश यात्रा के साथ हुआ. बैंड-बाजों की मधुर धुन, ढोल-नगाड़ों की थाप और हरिनाम के जयघोष से पूरा नगर भक्तिमय वातावरण में सराबोर हो गया. सैकड़ों श्रद्धालुओं की सहभागिता, पुष्पवर्षा और श्रद्धा भाव ने इस पावन आयोजन को अविस्मरणीय बना दिया. पं. सुनीलकृष्ण व्यास के ओजस्वी प्रवचनों ने कथा के प्रथम दिवस को आध्यात्मिक ऊर्जा से भर दिया, जिससे नगरवासियों में शांति, भक्ति और आनंद का संचार हुआ.

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70 की उम्र में सांप को गले लगाकर दिया का संदेश

एक 70 वर्षीय बुजुर्ग महिला ने सांप को लेकर समाज में फैले डर और भ्रांतियों को तोड़ते हुए ऐसा साहसिक कदम उठाया कि पूरा इंटरनेट देखता रह गया। पुणे जिले के एक गांव की शकुंतला सुतार ने अपने घर में घुसे एक अजहरी (धामन) सांप को न सिर्फ बेधड़क उठाया, बल्कि उसे गले में डालकर लोगों को जागरूक करने का संदेश भी दिया।

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आँखों में दर्द और मुस्कान लिए खड़ी लड़की, प्रेम और बिछड़ाव का पल

प्रेम का एहसास

प्रेम का पहला धुँधलका मैंने उसकी आँखों में देखा था वहाँ कोई असहज चाह नहीं, बल्कि एक ऐसी कोमलता थी जिसमें मेरा अस्तित्व अनायास घुलने लगता था। उस क्षण में प्रेम और देह, दोनों किसी पवित्र स्वीकृति की तरह एक-दूसरे में समा रहे थे।
मैंने महसूस किया था कि कुछ खोने की प्रक्रिया हम दोनों के भीतर एक साथ चल रही है अपने-अपने विश्वास, अपनी सुरक्षा, अपनी आदतें… मानो प्रेम हमें भीतर से उधेड़कर, नए रूप में बुन रहा हो।

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एक व्यक्ति दूसरों को सहारा देते हुए पेड़ की छाँव में बैठा, इंसानियत और सहानुभूति का प्रतीक दृश्य।

रिश्तों की सच्चाई

यह कविता जीवन की भागदौड़ में खोती इंसानियत को जगाने का प्रयास है। इसमें रिश्तों की सच्चाई, अहंकार से परे जाकर दूसरों को समझने और साथ देने का गहरा संदेश छिपा है।

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मां कुष्मांडा की स्तुति

“बुध ग्रह की स्वामिनी, ममता का रूप धारण करने वाली मां कुष्मांडा, भक्तों को रूप-बुद्धि प्रदान करती हैं और अष्टभुजा से दुष्टों का संहार करती हैं। नवरात्रि के चतुर्थ दिवस पर पीले रंग का पूजन, केसर पेड़ा और मालपुए का भोग अति प्रिय है।”

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औषध या टोना

“ज्ञान जब अज्ञान में डूब जाए तो टोना कहलाता है…
पर समझो तो वही औषध है, वही विद्या।” गाँव के लोग जिन शब्दों को मंत्र समझते थे, वे दरअसल उपचार थे और जिस औरत को ‘डायन’ कहा गया, वही जीवन लौटाने वाली वैद्य निकली। विश्वास और अंधविश्वास की पतली सरहद उस रात फिर धुंधली हो गई।

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गुप्त प्रेम

मैं तुम्हें शब्दों में नहीं, तुम्हारी ख़ामोशी में चुनता हूँ। जैसे अँधेरी रात में जुगनू से रोशनी मिलती है, वैसे ही तुम मेरे भीतर उजाला भर देती हो। मैं तुम्हारे एकांत में भी तुम्हें प्रेम करता हूँ, क्योंकि वहाँ तुम सबसे सच्ची होती हो। सपनों में तुम्हारा कोई अंत नहीं होता — इसलिए तुम्हें मैं अपनी आख़िरी साँस तक माँगता रहूँगा।

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स्वतंत्र कलम का हकदार होता है सच्चा पत्रकार

सोशल मीडिया के दौर में सच्ची और फर्जी खबरों के बीच का अंतर लगातार धुंधला होता जा रहा है। बिना प्रमाण-पत्र के स्वयं को पत्रकार बताकर कुछ लोग बेबुनियाद खबरें फैलाकर जनता को भ्रमित कर रहे हैं, जिससे असली और जिम्मेदार पत्रकारिता पर सवाल खड़े हो रहे हैं। जबकि सच्चा पत्रकार वही है जो निष्पक्षता, सत्य और सामाजिक दायित्व के साथ समाज और सरकार के बीच एक सेतु बनकर कार्य करता है।

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