असली वजह
त्योहार और व्रत जीवन का हिस्सा हैं, लेकिन समय के साथ उन्हें निभाने की शक्ति और परिस्थिति भी बदलती है। सेनु हर साल पूरे उत्साह से व्रत करती है, पर पति की चिड़चिड़ाहट उसे खटकती है। सब्ज़ी मंडी की भीड़, पूजा की लंबी सूची और वर्षों की थकान के बीच पति का यह कहना कि “भक्ति उतनी ही करो जितनी शक्ति हो” उसे भीतर तक छू जाता है। आखिरकार, त्यौहार का अर्थ ईश्वर को खुश करना नहीं, बल्कि अपने परिवार और खुद को संतुलन में रखना भी है।