
सुरेश परिहार, संपादक, लाइव वायर न्यूज, पुणे
विंध्याचल की ऊंची पहाड़ियों पर २००० फीट की ऊंचाई पर बसा मांडू केवल एक ऐतिहासिक नगर नहीं, बल्कि भावनाओं, स्थापत्य और प्रकृति का जीवंत उत्सव है. यहां पहुंचते ही लगता है जैसे समय ठहर गया हो और हर दीवार कोई दास्तान सुनाने को तैयार हो.स्वर्ग सा सौंदर्य.
बादलों की गोद में बसा मांडू
बरसात के मौसम में मांडू हरे मखमली कालीन से ढक जाता है. बादल पहाड़ियों से टकराकर महलों और गुंबदों के बीच तैरते दिखाई देते हैं. जहाज महल झीलों में अपनी परछाई के साथ ऐसा प्रतीत होता है मानो सचमुच पानी पर तैर रहा हो. रूपमती मंडप से दूर बहती नर्मदा और निमाड़ के मैदानों का दृश्य आंखों को सुकून देता है. सूर्योदय और सूर्यास्त के समय यहां का आसमान सुनहरे और गुलाबी रंगों से भर जाता है. फोटोग्राफी प्रेमियों और प्रकृति प्रेमियों के लिए यह स्थान किसी स्वप्न से कम नहीं
.इश्क और इमारतें. इतिहास की अमर कहानी
मांडू का नाम आते ही बाज बहादुर और रानी रूपमती की प्रेम कथा याद आती है. कहा जाता है कि रानी रूपमती प्रतिदिन नर्मदा दर्शन के बिना भोजन नहीं करती थीं, इसलिए उनके लिए ऊंचाई पर मंडप बनवाया गया जहां से वे नदी को निहार सकें. जामा मस्जिद की भव्यता और होशंग शाह का संगमरमर का मकबरा स्थापत्य कला के अद्भुत उदाहरण हैं.
इतिहासकार मानते हैं कि होशंग शाह के मकबरे से प्रेरणा लेकर ताजमहल का निर्माण किया गया. हिंडोला महल की झुकी दीवारें उसे झूले जैसा रूप देती हैं. अशरफी महल कभी मदरसा था और यहां सात मंजिला विजय स्तंभ भी बनाया गया था, जिसकी केवल एक मंजिल आज शेष है.
….जो मांडू को बनाते हैं खास
मांडू के चारों ओर लगभग ४५ किलोमीटर लंबी परकोटे की दीवार और १२ भव्य द्वार हैं, जिनमें दिल्ली दरवाजा प्रमुख है.यहां अफ्रीका से लाए गए बाओबाब वृक्ष आज भी मौजूद हैं. इनके खट्टे फल को स्थानीय लोग खुरासानी इमली कहते हैं और इसका उपयोग व्यंजनों में किया जाता है. जहाज महल दो कृत्रिम झीलों के बीच बना है और इसकी बनावट इसे तैरते जहाज जैसा आभास देती है.
स्वाद का सफर-मांडू की मशहूर दाल पनिया
मांडू की यात्रा दाल पनिया चखे बिना अधूरी है. मक्के के आटे से बने पनिया को तंदूर में पकाया जाता है और मसालेदार दाल के साथ परोसा जाता है. इसका धुआंदार स्वाद लंबे समय तक याद रहता है.
कैसे पहुंचे.- सफर आसान और सुगमवायु मार्ग
निकटतम हवाई अड्डा इंदौर का अहिल्याबाई होलकर हवाई अड्डा है, जो लगभग ९५ किलोमीटर दूर है. यहां से सड़क मार्ग द्वारा मांडू पहुंचा जा सकता है.
रेल मार्ग-निकटतम प्रमुख रेलवे स्टेशन रतलाम लगभग १३० किलोमीटर दूर है. इंदौर भी रेल से अच्छी तरह जुड़ा हुआ है.
सड़क मार्ग- इंदौर और धार से नियमित बस सेवाएं उपलब्ध हैं. इंदौर से यात्रा में लगभग तीन घंटे लगते हैं. निजी टैक्सी और कार भी आसानी से मिल जाती हैं
.कहां ठहरें-विरासत और आराम का संगममांडू में मध्य प्रदेश पर्यटन के विश्राम गृह और होटल उपलब्ध हैं, जहां से झीलों और महलों का सुंदर दृश्य दिखाई देता है. इसके अलावा निजी होटल, गेस्ट हाउस और रिसॉर्ट भी हैं, जो बजट से लेकर प्रीमियम श्रेणी तक सुविधाएं प्रदान करते हैं.यदि आप शांति और प्रकृति के करीब रहना चाहते हैं तो झील के आसपास स्थित आवास सर्वोत्तम विकल्प हैं
घूमने का सही समय. जब मांडू दिखता है सबसे खूबसूरत
जुलाई से मार्च के बीच मांडू घूमने का सर्वोत्तम समय है. बरसात में हरियाली अपने चरम पर होती है, जबकि सर्दियों में मौसम सुहावना रहता है. गर्मियों में तापमान अधिक हो सकता है.
मांडू- जहां हर पत्थर सुनाता है कहानी
मांडू केवल एक पर्यटन स्थल नहीं, बल्कि प्रेम, कला, इतिहास और प्रकृति का संगम है. यहां की हवाओं में संगीत है, दीवारों में इतिहास और वादियों में जादू. एक बार मांडू की यात्रा कीजिए, यह शहर हमेशा के लिए आपके दिल में बस जाएगा.
Wow superrrrr
बहुत खूब !
Very nice stay blessed
बहुत सुंदर अच्छी जानकारी
बहुत खूब !