
विजया डालमिया, प्रसिद्ध लेखिका, हैदराबाद
18 दिसंबर 2022
दोपहर 3:00 बजे हम एयरपोर्ट के लिए घर से निकले और शाम 7:00 बजे प्लेन में बैठे। अगर हमारी फ्लाइट लेट नहीं होती, तो हम इस वक्त तक गोवा पहुँच चुके होते। एयरपोर्ट से ही हमने गाड़ी हायर की और सीधे बागा बीच के “लास ओलास” रेस्टोरेंट पहुँचे, जहाँ की रौनक ही कुछ और थी। हर तरफ चहल-पहल और धूम-मस्ती। सामने दूर-दूर तक फैला समुद्र और आती-जाती लहरों का शोर।
रेस्टोरेंट में बैठने के लिए पलंगनुमा चौकियाँ बनी थीं, जिन पर हम सब आराम से बैठकर खाने-पीने और मौज-मस्ती का आनंद ले रहे थे। हम सब बालू पर चलते हुए आए थे, इसलिए काफ़ी थक गए थे। बीच पर जगह-जगह फुट मसाज की सुविधा भी थी। फुट मसाज करवाकर हमें बहुत सुकून मिला। कब रात के 3:00 बज गए, पता ही नहीं चला। जब घड़ी पर नज़र गई, तब समझ आया कि अब हमें लौटना चाहिए। वहाँ सारी रात हो-हल्ला चलता रहता है।
19 दिसंबर
सुबह हम बागा बीच के “ब्रिटोस” में नाश्ता करने गए, जहाँ सुनहरी धूप में चमकती लहरों के साथ नाश्ते का मज़ा लिया। दरअसल दिन में गोवा बहुत गर्म होता है और धूप काफ़ी चुभती है, इसलिए कहीं और जाने की बजाय हम रेस्टोरेंट में बैठे-बैठे लहरों का आना-जाना देखते रहे। थोड़ी-बहुत शॉपिंग की, बच्चों जैसी हरकतें कीं और फिर अपने ठिकाने लौट आए।
शाम 5:00 बजे हम अंजुना बीच पहुँचे। नीचे समुद्र की लहरें और ऊपर बने रेस्टोरेंट ऊपर बैठकर लहरों को देखना बहुत सुकून दे रहा था। म्यूज़िक बहुत लाउड था और रोशनी कम। अंजुना बीच का सनसेट बेहद खूबसूरत होता है। यहाँ समुद्र की लहरों के बीच लगे दो झूले इसे और भी खास बना देते हैं। लहरों की गर्जना के साथ झूला झूलना अपने आप में एक अनोखा अनुभव था।
फिर हम वहाँ से निकलकर कैंडोलिम बीच पहुँचे। नज़ारा तो वही था मस्ती में डूबे लोग। लेकिन बालू पर लगी टेबल-कुर्सियों पर बैठकर जब हम खाना खा रहे थे और लहरें आकर हमें छू जाती थीं, तो वह एहसास बेहद अच्छा लग रहा था।
करीब 11:00 बजे हम वहाँ से लौट आए, क्योंकि आज हम समय पर पहुँचकर सोने के मूड में थे।
20 दिसंबर
सुबह जल्दी ही हम ब्रेकफास्ट के लिए फिर कैंडोलिम बीच पहुँच गए लहरों के साथ मस्ती भरी मुलाकात करने। दोपहर में हम साउथ गोवा के लिए रवाना हुए। जहाँ नॉर्थ गोवा शोर-शराबे, यंगस्टर्स की हलचल और रंगीनियों के लिए जाना जाता है, वहीं साउथ गोवा शांति का प्रतीक है।
साउथ गोवा के बेहतरीन रिसॉर्ट्स में से एक है “प्लेनेट हॉलीवुड रिसोर्ट”, जो सारी सुख-सुविधाओं के साथ बेहद खूबसूरत है। वहाँ रात में हमने कराओके के साथ गानों का आनंद लिया और स्विमिंग पूल का भी।
21 दिसंबर
सुबह-सुबह रिसोर्ट के ठीक पीछे, कुछ ही कदमों की दूरी पर स्थित बीच पर हम सूर्योदय देखने पहुँचे। सुनहरी धूप में चमकती लहरें और दमकती बालू बहुत खूबसूरत लग रही थीं। यहाँ सागर किनारे की बालू बेहद चिकनी और मुलायम होती है, जिसका स्पर्श मख़मली एहसास कराता है …ठीक पहले प्यार की तरह।
सुबह-सुबह लहरों से मुलाकात बहुत अच्छी लगी। लहरें भी तो समय की तरह होती हैं…जो एक बार हमें छूती हैं, उनसे दोबारा कभी मुलाकात नहीं होती। ठीक उसी तरह जैसे ज़िंदगी में कई लोग मिलते हैं और फिर बिछड़ जाते हैं।
वहीं बीच पर मैंने सालों बाद किसी से अपनी चोटी गुँथवाई। बीच पर कई महिलाएँ रंग-बिरंगे ऊन के गोलों की मदद से बालों में चोटी गूँथ देती हैं, जो बहुत खूबसूरत और अलग लुक देती है। मुझे मेरी मम्मी याद आ गईं। जब मेरे बाल छोटे थे और मैं ज़िद करती थी “लंबी चोटी… लंबी चोटी…” तो मम्मी रिबन को चोटी की तरह गूँथकर उसकी लंबाई बढ़ा देती थीं।
शाम को पहले स्विमिंग पूल में खूब एंजॉय किया। अपने पोते को पूल में तैरते देखना बहुत अच्छा लग रहा था।
सूर्योदय के समय सूरज की लालिमा और सूर्यास्त के समय उसकी कालिमा दोनों ही बेहद खूबसूरत लगती हैं। डूबते-डूबते सूरज आसमान में रंगों की अनगिनत छटाएँ बिखेर देता है। यह नज़ारा तब और खास हो गया, जब हमने साथ में कई रोमांटिक गाने गाए—एक-दूसरे की आँखों में आँखें डालकर। सचमुच, ऐसे पल दिल के कैमरे में हमेशा के लिए कैद हो जाते हैं।
रात में रोज़र रेस्टोरेंट में गरमा-गरम सिज़लर और दूसरी चीज़ों का मज़ा लिया गया। मेरे पति और बच्चे कैसीनो चले गए और सारी रात वहीं रहे। हम रूम में गोवा में बिताए लम्हों को सोचते-सोचते सो गए।
सुबह उठकर रिसोर्ट में अपने ही रूम के बाहर बैठकर हरियाली और ठंडी हवा के बीच गरमा-गरम चाय का आनंद लिया। गोवा का यह सफ़र वाकई बहुत शानदार रहा। पूरी फैमिली…दोनों बेटे, बहू और खासकर पोते के साथ…हमने भरपूर एंजॉय किया।
इस ट्रिप की सबसे मज़ेदार बात यह रही कि पूरी यात्रा के दौरान हमारा बाबू हम सबको “लकड़ी की काठी” और “नानी तेरी मोरनी” गाना रटवाता रहा। जब भी उसका मूड होता, वह बोलता “गाओ…” और अगर हम न गाएँ, तो रोना शुरू! उसकी ज़िद पर हम सब गाने लगते, और इसी में हमें बहुत मज़ा आया।
गो… आ… में हर आने-जाने वाले के चेहरे पर खुशी और मस्ती की ऊर्जा देखकर बस यही मुँह से निकलता रहा-
“वाह… गोवा वाह!”
Bahut accha varnan kiya hai safar ka aapne
Sach mein Vijaya ji ka Goa yatra ka sansmaran padhakar Laga Jaise ham swayam Goa mein ghoom rahe hain aankhon dekha drishya ko Kalam Se utarana har Koi use apna samjhe yah Vijay ji mein bahut badi khubi hai