फुगी, नवी और मैं

पशुओं से सीखी इंसानियत की कहानी

सुरभि ताम्रकार, प्रसिद्ध लेखिका, दुर्ग

पंचतंत्र की कहानियों के जीव-जंतु मुझे हमेशा सच लगते थे. पर यह बात सचमुच दिल को छूने वाली तब बनी, जब मेरी जिंदगी में नवी आईमेरी श्वान, मेरी साथी, मेरी नन्ही सी बच्ची. उसकी सुबह अपनी सहेली फुगीएक शांत-सी बिल्लीऔर उसके चार बच्चों के साथ होती है. कॉलोनी में जब यह बेधड़क डॉगकैट जोड़ी घूमती है, तो ऐसा लगता है मानो इन्हें किसी ने जेड प्लस सिक्योरिटी दे रखी हो. यह दृश्य हमारी दिनचर्या का हिस्सा बन चुका है.
नवी पोमेलियन और लेब्राडोर की क्रॉस-ब्रीड है. पर उसकी दोस्त एक साधारण-सी बिल्ली कैसे बनी? यह कहानी उन दिनों की है जब नवी ने पहली बार फुगी को घायल देखा. मुझे डर था कि कहीं आवेश में उसको नुकसान न पहुँचा दे, पर नवी उसके पास बैठ गई चुपचाप, जैसे कह रही हो डर मत, मैं हूँ न.


शायद उसे याद था कि कैसे हम एक घायल गाय का इलाज करते थे. उसी भरोसे से वह फुगी के घावों को बार-बार चाटकर उसे हिम्मत दिला रही थी. उसकी उस जिद को देखकर मैं भी पिघल गई और फुगी को घर ले आई.
धीरे-धीरे यह आदत बन गई. जो भी घायल दिखे बकरी, तोता, गाय, कबूतर या बिल्ली नवी को पूरा भरोसा है कि पापा और दीदी सब ठीक करना जानते हैं.
7 नवंबर 2022 वह दिन जब नवी हमारे घर आई थी. उसकी माँ नहीं रही थी, और सच कहूँ तो पहले-पहल मैंने साफ शब्दों में इनकार कर दिया था. घर के काम, सफाई और मेरी अपनी थकान मुझे कुत्ते बिल्कुल पसंद नहीं थे. लेकिन कहते है. भाव और व्यवहार मन बदल देते हैं. नवी ने भी मेरे विचार बदल दिए. आज मेरी दुनिया नवी के बिना अधूरी है.
सुबह उठते ही मैं मोबाइल नहीं देखती. पहली मुस्कान नवी की होती है. वह पापा से सीखकर रोज पैर धोती है, और मां से सीखे अनुसार ब्रश किए बिना खाना नहीं खाती. जल्दी सीखने की उसकी क्षमता मुझे हमेशा चकित करती है. हमारे संवाद शब्दों से नहीं, भावों से होते हैंचीकू, चिक्की, हनी, गोदू, फुगू, मिट्ठी, राजा, टुक-टुक, टिन्नी, चांदनी, मीनाये सब उसके दोस्त, जिनसे उसे किसी न किसी मुसीबत में दोस्ती मिली.


18 अगस्त की सुबह 4:20 हमारी एक साल पुरानी बिल्ली अचानक लौट आईहम तो पहचान तक नहीं पाए, पर नवी ने पल भर में पहचान लिया. वह आई थी बच्चे देने. चार नन्हे बच्चे. और नवी ऐसे उनकी देखभाल कर रही थी जैसे वे उसी के बच्चे हों. शायद उसे लगा कि मां का दूध कम है, तभी उसने गाय का दूध पीना बंद कर दिया. उसकी साथी बिल्ली भी चालाक है. नवी के हिस्से का दूध आखिरी में छोड़ जाती है. दोनों में प्यार भी है और छोटे-मोटे झगड़े भीखासकर तब, जब बिल्ली घर में चूहा लाती है. पर नवी शाकाहारी है, इसलिए बिल्ली ने भी घर में मांसाहार लाना छोड़ दिया.
नवी की पसंद भी मजेदार हैसब्जियाँ, फल, कढ़ीचावल, पोहा, करेले से लेकर इडलीदोसा तकबस शाकाहार होना चाहिए. नहाना उसे बेहद पसंद है. दोस्तों संग पानी में खेलना, फिर हेयर ड्रायर की गर्म हवा और गहरी नींद. भजन, जप, मंदिर की परिक्रमासब उसकी दिनचर्या का हिस्सा बन गए हैं.
अब जनवरी में उसे इंजेक्शन लगने हैं और वह इस बात से ऐसे डरती है जैसे कोई इंसान साँप देखकर डर जाए. पटाखे और माचिस उसके कट्टर दुश्मन हैं. गंदा काम कहने पर गुस्सा करती है. काका सुनते ही दूध वाले भैया याद आते हैं. कचरा यानी डस्टबिन देना है. अप्पा खाना. हूप बंदर से दूरी. आरती प्रार्थना का समय. घूमी कार राइड. गो स्कूटी सैर. घर में चलो और चाबी ये दो शब्द सावधानी से बोले जाते हैं, क्योंकि मैडम तुरंत तैयार! डॉक्टर अंकल दुश्मन, ड्राइवर भैया दोस्त, और दीदी सबसे प्रिय. मां से रिश्ता कभी-कभी खट्टामीठा क्योंकि मां लड्डू और गन्ना खाने पर डाँट लगाती हैं.
दिवाली उसका सबसे कठिन समय है. पटाखों की आवाज और गंध से बेचैन हो जाती है. कान तो मैं बंद कर देती हूँ, पर नाक का क्या करूँ? यह समय आसान नहीं होता, पर निकल जाता है.प्यार और धैर्य से.


और 5 दिसंबर को

मैं भारी मन से यह लिख रही हूँ. कल शाम नवी एक घायल कबूतर को उठा लाई. हमने पूरी कोशिश की, पर वह बच नहीं पाया. नवी रो रही थी और उसके रोने से घर का हर सदस्य चुप और उदास हो गया. तब मुझे सर की बात याद आईलिखना चाहिए. और मैं लिखने बैठ गई वह भी मेरी आवाज सुनते-सुनते मेरे पास लेटी है. यह मेरी कविता भी सुनती है. शायद यही उसका जादू है.
इंसान, तोता, कबूतर, बिल्ली, बकरी, गाय, कोयलसब को अपना बनाने की अद्भुत शक्ति है उसमें. मेरी दुनिया का केंद्रबिंदु है वह.
कभी-कभी मुझे कहानी चेंदरू और बाघ की याद आती है. जो हम बचपन में सीखते थे. ऐसा ही रिश्ता है नवी और मेरे बीच भी. उसकी दयालुता मुझे मोम कर देती है. घर से बाहर रहती हूँ तो सबसे पहले घर पहुँचने की जल्दी उसी की वजह से होती है. उसकी आँखों में जो भावुकता है. उसमें मुझे अपनी नानी और मां की झलक दिखाई देती है.नवी सिर्फ एक पालतू नहीं.वह मेरे जीवन का वह अध्याय है, जो रोज मुझे इंसानियत, करुणा और प्रेम का मतलब समझाता है.

4 thoughts on “फुगी, नवी और मैं

  1. आपका प्राणियों के प्रति दया भाव बहुत सराहनीय है, हम कल्पना कर सकते हैं कि आपके घर का माहौल कैसा होगा. जब आपके यहां के प्राणी ही इतने दयालु और केयरिंग हैं तो

  2. बहुत सुंदर विचार और आपकी अभिव्यक्ति 👌👌

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