चल पड़े हैं ये कदम, उस शिखर की चाह में,
राह है कठिन मगर, है मंजिलें निगाह में।
बुझा सका न तूफां, न बुझा सकेगी आंधी कोई,
ये हौसले का दिया, है रख दिया अब राह में।
हर कदम पे रोशनी, हर सांस में है उमंग,
अरमान की उड़ान में, नए सपनों का है संग।
न थकेंगे कभी ये पांव, न रुकेगा यह सफर,
मन मयूरा उड़ चला कह, अब नहीं रुकना हमें।
हौंसला ये जोश का, कम नहीं होने देंगे,
गीत संघर्षों का, खत्म नहीं होने देंगे।
मंज़िलों को जीत लेंगे, आसमां पर परचम हमारा,
जोश और जुनून से अब सपने सच करना हमें।
गुनाह कर जो वक्त ने, किया हमें मजबूर,
आगाह कर ये वक्त भी, देगा हमें नूर।
विश्वास का दीप है, अंधकार पर जीत है,
असफलता के दामन से, सफलता है छीनना हमें।
कसम ये खाई हमने, रुकावटें झुकेंगी यहां,
अंधेरे भी डरेंगे, देख रोशनी का कारवां।
हम वो हैं जो लिखेंगे, नये इतिहास के पन्ने,
जीत लेंगे जहां को, हर मुश्किलों के संग चलना हमें।

डॉ.शशिकला पटेल, प्रसिद्ध लेखिका, मुंबई