
सपना परिहार, प्रसिद्ध लेखिका, बिरलाग्राम नागदा जंक्शन (मध्यप्रदेश)
बचपन से गाड़ियों पर लिखे इस छोटे से शब्द को बड़े गौर से पढ़ते चले आ रहे हैं।छोटे में ज़ब पापा की गाड़ी का हॉर्न बजा देती थी तो पापा बहुत गुस्सा होते थे, बोलते थे कि ये हॉर्न तब बजाते हैं ज़ब हमें साइड की आवश्यकता हो। लोग हॉर्न की आवाज सुनकर एक तरफ हो जाते हैं। अगर आज के परिपेक्ष में यह बात कही जाय तो जितने हम अपने जीवन में व्यस्त हो रहे हैं, हमें अपने आस -पास के लोगों का ध्यान नहीं रहता। या ये भी है कि हमारे बगल में चलने वाले को ये पता नहीं होता कि पीछे क्या है या कुछ होने वाला है। अत्याधिक शोर, अंधाधुंध गाड़ियों का काफिला, बढ़ता ध्वनि प्रदूषण, हमारे जीवन में इस कदर हावी हो रहा है कि हमें हमारे पास खड़े या चलने वाले का ध्यान सिर्फ अपनी दुनियां में रहता है। फिर चाहे आप कितना ही उसे संकेत करें साइड में हटने के लिए उसे आपके “हॉर्न “की आवाज बिलकुल सुनाई नहीं देगी। या यूँ कहे कि भैया वह जानबूझ कर बहरा और अंधा बन जाता है। और अगर गलती से भी उसे किसी प्रकार की हानि हुई तो आपकी खेर नहीं।
आप लाख अपनी गाड़ी में हॉर्न लगवाएं, उसे जोर -जोर से बजाएँ सामने वाले के कान में जूँ तक नहीं रेंगेगी, वह तो अपनी मस्ती में ही जायेगा जैसे वह रास्ता उसका ही है केवल।
कई बार हादसे ऐसे ही हो जाते हैं। ट्रेन के हॉर्न देने पर भी लोग सुपर हीरो की तरह गाड़ी को चिढ़ाते हुए सामने से निकल जाते हैं, बड़ी गाड़ियों को क्रॉस करके अपनी बहादुरी दिखाते हैं।बिना अपनी जान की परवाह किये बिना ऐसा जोखिम उठा जाते हैं।
और कुछ तो इतने महान होते हैं कि बिना कारण के ही स्पीड में गाड़ी चलाते हुए हॉर्न को नॉन स्टॉप बजाते निकलते हैं जैसे कि फायर बिग्रेड की गाड़ी जा रही हो। ऐसे लोग न तो अपनी सुरक्षा का ध्यान रखते हैं और न ही दूसरों के प्राणों की रक्षा के बारे में सोचते हैं। इन सब में एक और विचित्र प्राणी पाए जाते हैं जो अपनी गाड़ी में विशेष “हॉर्न ” लगवाते हैं जिसकी आवाज कानों में बहुत चुभती है। शौक बड़ी चीज है भैया । फिर चाहे उससे किसी को तखलीफ़ ही क्यों न हो हमें तो अपने शौक जो पूरे करने हैं।
तो अगली बार अगर कोई हॉर्न बजाए तो कृपया ध्यान अवश्य दीजियेगा, शायद दूसरे का हॉर्न बजाना आपके लिए सुरक्षित हो।
बहुत अच्छा ।
बहुत खूब लिखा है बिलकुल सत्य