
माधुरी सोनी, लेखिका, अलीराजपुर, मध्यप्रदेश
हिंद देश का हृदय स्पंदन,
देववाणी की यह अनुजा।
राष्ट्र–हिंदू की अस्मिता का,
ध्वज यहां पर सदा सजा।।
भरत-भारती सनातनी ये, वेदों की पहचान है।
शास्त्र, तर्क और शोधों से ही, हिंदुत्व की पहचान है।।
भाल रोली का दिव्य दिवाकर, भारत मां की शान है।
हिंदी हमारी आन है, यही हमारी शान है।।
पौराणिक ग्रंथों की महिमा से, क्रांति के स्वर उपजे।
एक राष्ट्र की विविधता के, रंग सभी इसमें निपजे।।
मां की लोरी सी निर्मल यह, सभी रसों की खान है।
हिंद देश का हृदय है हिंदी, यही हमारी शान है।।
सृजन और शिल्प भाषा का, सजता अभिव्यक्ति स्वरूप।
काव्य, दोहे या गद्य-पद्य हों, बनते सदा अद्भुत रूप।।
बोलियों के रंग-लोक से, क्षेत्रीयता पहचान है।
हिंद देश का हृदय है हिंदी, यही हमारी शान है।।
कबीर, तुलसी, सूर, जायसी,
मीरा की भक्ति इसमें।
मैत्री का सद्भाव भरे यह, संस्कृति की छवि इसमें।।
श्लोकों के गुणगान धरे, कभी स्तुति का गान है।
हिंद देश का हृदय है हिंदी, भारत का अभिमान है।।
राजभाषा का अपमान कहीं, सहन नहीं होता है।
राष्ट्रभाषा हिंदी ही हो, यही प्रश्न बस होता है।।
आइए समवेत स्वर से, हम मां जैसा सम्मान दें।
हिंद देश के वासी होकर, हिंदी को देश का नाम दें।।
हिंदी को देश का नाम दें।।
हिंदू राष्ट्र की कामना…
विभाजन की कामना है…
हम नहीं समर्थन में विभाजित मानस के
हिंदी हैं हम एक है हिंदोस्ता हमारा
हम बुलबुलें हैं इसकी ये गुलिस्तां हमारा