
डॉ. मीना मुक्ति, प्रसिद्ध लेखिका, लातूर
पुरुष ने बड़ी ख़ूबी से हासिल किए
मिट्टी और स्त्री में बीज बोने के अधिकार,
अपनी शक्ति से अधीन कर लिया।
पुरुष ने सब कुछ… जिसमें
स्त्री के मस्तिष्क का एक कोना भी था,
दिखावे की रंगीन दुनिया में
बड़ी ही सफाई से
अपना भार स्त्री के कंधे पर लाद दिया।
और अब,
स्त्रियों द्वारा पुरुष सत्ता-कमान कुशलता से
संभालने के बाद,
वह तुरंत जुट गया नए आदर्श की स्थापना में।
और अपराध भाव की जकड़न में
विद्रोह की लौ को स्त्रियों ने दबाया,
बड़ी ही सहजता से,
जो तब्दील हो रहा है धीरे-धीरे हलफनामे में।
अति उत्तम रचना
धन्यवाद आदरणीय मधु जी 🙏🏼