
अंजू शर्मा वशिष्ठ, करनाल, हरियाणा
हे मां भवानी आदिशक्ति,
तेरे बिना ना जीवन भक्ति।
तेरे चरणों की रज चाहूं,
दूर कर दे मेरी विपत्ति।
शक्ति-भक्ति का रूप है माता,
मां की शरण में जो है जाता।
भर देती उसकी खाली झोली,
जो भी श्रद्धा से मां को ध्याता।
कन्या रूप में शक्ति विराजे,
उनके चरणों से मंगल साजे।
शक्ति दो मां हर संकट में,
चहुं ओर तेरा डंका बाजे।
मां के चरणों में शीश झुकाए,
मां के द्वार पर दीप जलाएं।
मां का आशीर्वाद पाए,
दुर्गा अष्टमी का पर्व मनाएं।