आदत सी हो गई है इन चंद शब्दों की
थूक देता है जब कोई सड़क पर देख कर त्योरी तो चढ़ती है,
तभी फिर याद आता है
अपना क्या जाता है !
हमारी गंदगी को साफ करने वह जब गटर में उतरता है,
विषैली गैसों से जब वह अपनी
जान खोता है,
कहीं थोड़ा सा कुछ हमको भी तो खटकता है
तभी फिर याद आता है
अपना क्या जाता है ?
नवनिर्मित पुल जब कहीं कोई ढह जाता है,
परिवार कितनों का ही बर्बाद होता है
गुबार सा एक दिल में उठता है
तभी फिर याद आता है
अपना क्या जाता है
अस्पताल में बीमार , बीमारी से नहीं इलाज से मर जाता है
इंसानियत का जनाजा उठता है
तभी फिर याद आता है
अपना क्या जाता है ?
शिक्षा को जब सब्जी की जैसे बेचा जाता है
पढ़ने वाला बच्चा, सिस्टम की सूली चढ़ जाता है
खून खौलता है रगो में
तभी फिर याद आता है
अपना क्या जाता है ?

मधु चौधरी, लेखिका, रिसर्च असिस्टेंट, विल्सन, कॉलेज मुंबई
बहुत खूब लिखा मधु। बधाई।। ऐसा ही लिखती रहे और मुंबई ओर ग्वालियर का नाम रोशन करे। पुनः बधाई एवं शुभकामनाएं
Very true , and beautifully written
Superb madhu I have no words to say you UR very expensive keep it up
क्या बात है, जितनी तारीफ़ करें काम है,
इस सच्चाई को कोई झूठला नाजी सकता 👏
Wah …Jeevan ka Bina soacha satya
बहुत बढ़िया रचना है। समाज के मर्म को वही समझता है जो समाज का अपने आपको हिस्सा समझता है। आपमें वह समझ और वेदना है। मैं आपकी लेखनी को प्रणाम करता हूं।
🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏
हर गलत , गैर- कानूनन काम की सजा सख्ती से दी जाए तो डर से आदमी गलतियों से दूर हो जाता है । सिर्फ कानून का किताबों में होना काफी नहीं है । आम आदमी किसी सुधार के लिए प्रेरित कर सकता है , मजबूर नहीं ।
बहुत सटीक लेखन ।
धन्यवाद विनीता जी।
सही कहा आपने साहित्य के माध्यम से हम सिर्फ सोए हुए भावों को जगा सकते हैं
धन्यवाद अवनीश सर
आपने ही रास्ता दिखाया है, आपके शब्द मेरे लिए प्रेरणा के स्रोत है।
क्या बात है, जितनी तारीफ़ करें कम है,
इस सच्चाई को कोई झूठला नही सकता 👏
Very well written Madhu👌🏻. Relatable and makes us introspect …
Very well written didi….u have expressed what we have in our thoughts 👍😊
So thoughtful….so true
धन्यवाद अवनीश सर
आपने ही रास्ता दिखाया है, आपके शब्द मेरे लिए प्रेरणा के स्रोत है।