खुशी…

अर्चना अश्क मिश्रा प्रसिद्ध लेखिका, बोकारो

हमारी खुशी में सबसे बड़ी बाधा कोई और नहीं, हम खुद बनते हैं। यदि आप हमेशा उन चीज़ों के बारे में सोचते हैं, जो आपके नियंत्रण में नहीं हैं, तो यह जबरन आपको नकारात्मकता से भर देगा। फिर हमें किसी चीज़ में मन नहीं लगता, न खुद का ख्याल रखने में ही रूचि होती है। लगातार नकारात्मक विचार, माहौल और खबरें हममें एंग्जायटी पैदा करती हैं।

ऐसे में कोशिश करें कि जो दिनचर्या लंबे समय से चल रही है, उसमें थोड़ी फेरबदल करें। जिस कार्य या कोई हॉबी, जिसे करने से आपको खुशी मिलती हो, उसके लिए जरूर समय निकालें। दूसरों को भी समय दें और उनके साथ बातचीत करें, हँसें-बोलें।

सबसे अच्छा है परोपकार करना। परोपकार खुद पर ही उपकार होता है। हमें यह निश्चित तौर पर जान लेना चाहिए कि यह संसार हमारे बिना भी चलता रहेगा। हमें हमारी मानसिक अवस्था के अनुरूप ही यह संसार अच्छा या बुरा लगता है। कोई और किसी की मदद करे या ना करे, हमें जरूर आगे बढ़कर परोपकार करते रहना चाहिए।

दूसरों के लिए किए गए कार्य का मुख्य फल है—खुद की आत्मशुद्धि
बस यूँ ही अंतस के कुछ विचार।

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