कभी तो आओ
फुर्सत का इतवार बनकर
कभी तो आओ
आंसुओं की धार बनकर
कभी तो आओ
रागों में मल्हार बनकर
कभी तो आओ
रंगों का त्यौहार बनकर
कभी तो आओ
फुर्सत का इतवार बनकर

डॉ. दिव्या पांडेय, प्रसिद्ध कवयित्री, नैनीताल (उत्तराखंड)
कभी तो आओ
फुर्सत का इतवार बनकर
कभी तो आओ
आंसुओं की धार बनकर
कभी तो आओ
रागों में मल्हार बनकर
कभी तो आओ
रंगों का त्यौहार बनकर
कभी तो आओ
फुर्सत का इतवार बनकर

डॉ. दिव्या पांडेय, प्रसिद्ध कवयित्री, नैनीताल (उत्तराखंड)