अहसासों के कतरन…

1.
रात तलक झींगूर की आवाज़ रही,
बारिश ने जाने क्यों घुँघरू का साथ दिया…

2.
उनकी महफ़िल में हमें छोड़ सब अपने थे,
मगर निगाहें उनकी, इशारे उनके मेरी तरफ़…

3.
हम तो पानी की एक बूँद हैं
मिट्टी पे गिरे तो उसकी,
पत्तों पे गिरे तो उसकी,
लहरों से मिले तो सागर बन गए…

4.
रिश्ते निभाए हमने, व्यापार नहीं किया,
दर्द हो, पत्थर को भी ऐसा व्यवहार नहीं किया,
खुशखबरी नहीं, दुनिया ने क्या दुनियादारी रखी,
हमने शब्दों से कभी किसी का तिरस्कार नहीं किया…

खुशी झा, सुप्रसिद्ध कवयित्री, मुंबई

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