झंकार में दबा इंतज़ार

पूनम सिंह, प्रसिद्ध लेखिका, मेरठ

निगोड़ी पायल करे झंकार,
बाजे कंगना बार-बार…
कैसे आऊँ मैं तुमसे मिलने,
साथ मेरे उलझन हज़ार।

नैनन अविरल अश्रुधार,
हृदय उठाए पीड़ा अपार।
कैसे आऊँ मैं तुमसे मिलने,
धुल गए मेरे सब साज-शृंगार।

रतिया कटती चंद्र निहार,
कोरे काग़ज़, स्वपनिल संसार।
कैसे आऊँ मैं तुमसे मिलने,
उदासी खड़ी बन पहरेदार…

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