मैं जब पेड़ लगाता हूँ

जिज्ञासा सिंह, प्रसिद्ध लेखिका, लखनऊ

मैं जब पेड़ लगाता हूँ,
मिलता मुझको बड़ा सुकून।
गर्मी-सर्दी हर मौसम में,
पानी डालूँ दोनो जून॥

दादी कहतीं आम लगेंगे,
तुम खाओगे हम खाएँगे।
पेड़ों पर रह रही गिलहरी,
चिड़ियाँ, कौए भी खाएँगे॥

पेड़ हमें पेंसिल देंगे,
दें काग़ज़ और किताब।
घर का फ़र्नीचर भी देते,
देते ठाट-रुआब॥

डालों पर झूला झूलूँगा,
सारे दोस्त बुलाऊँगा ।
देगा झूला बड़ा सुकून,
अम्बर जब छू जाऊँगा॥

One thought on “मैं जब पेड़ लगाता हूँ

  1. बहुत सुंदर सारगर्भित चित्र के साथ बाल कविता का प्रकाशन सुखद अहसास दे। आभार और शुभकामनाएँ सुरेश जी।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *