
उदय सत्यार्थी, प्रसिद्ध विचारक एवं लेखक, पुणे
असुंदर है
मनुष्य का मनुष्य से भेदभाव करना,
एक को महान, दूसरे को तुच्छ बताना।
असुंदर है —
पुरुष को मोक्ष का अधिकारी मानना,
और स्त्री को पैरों की जूती ठहराना।
असुंदर है —
पत्थरों को ईश्वर कहना,
और मनुष्यों से पशुओं-सा व्यवहार करना।
असुंदर है —
गाँव के बीच मंदिर खड़ा करना,
और कुछ लोगों को गाँव के बाहर बसाना।
असुंदर है —
पत्थरों की पूजा करना,
और उन्हीं पर पशुओं की बलि चढ़ाना।
असुंदर है —
लोगों को जातियों में बाँटना,
और धर्मों को आपस में लड़ाना।
असुंदर है —
मेहनतकश हाथों से बने पुलों का ढह जाना,
एयरपोर्टों का गिर जाना,
और नेताओं के ज़मीर का मर जाना।
असुंदर है —
सिग्नल पर भीख माँगते बच्चों को देखना,
और हमारी आत्मा का धीरे-धीरे मर जाना।
बहुत असुंदर है —
ऊँची-ऊँची बातें करना,
पर ज़मीन पर फैले नरक को न देख पाना।
असुंदर है —
जनता का भीड़ बन जाना,
और आज़ाद सोच वाले व्यक्ति का मर जाना।
असुंदर है —
दृष्टि की बातें करना,
और हमारा क्रमशः अंधा हो जाना।
सच में असुंदर है , कोशिश करते हैं असुंदर को सुंदर बनाने की
सच में असुंदर है
बहुत सही एवं सटीक कथन
आताच्या घडत असलेल्या वागणुकी नुसार
जनतेला ह्या कवितेच्या माध्यमातून स्वतः मध्ये चांगला बदल घडवून आणण्या करीता खूप छान कविता लिहिली आहे.
सुन्दर ही बहुत ही असुन्दर
ये कवि और उनकी कविता दोनों विचारशील है। कहीं तो जिंदगी की सच्चाई जीवित है इसलिए हमारा जीवन चल रहा है। धन्यवाद कवि को और उनके विचार को!
लिखते रहो !!!
सुंदर है |
कोरे कागज पर सच्चाई उताराने की कला |
सुंदर है |
निडरता से लिखना |
सुंदर है |
कविता के साथ परिवर्तन की राह पर निकल पडना |
सुंदर होगा |
ऐसे विचारोंको जिमेदारीसै अपनाना|
सुंदर भावपूर्ण रचना 🌹🌹
बहुत दुखद होता है असुन्दर को सुंदर मानना
और उसकी तरफदारी करना।