माँ का संवाद बेटे से…
माँ अपने बेटे से कहती है—
“दिल के टुकड़े को खुद से दूर भेजना किसी माँ के लिए आसान नहीं होता। तुम्हारी तरक्की और खुशियों के लिए हमें यह कड़वा घूँट पीना पड़ता है। शायद तुम्हारे लिए भी यह सफ़र सहज न हो—कभी आज़ादी गुदगुदाएगी तो कभी जिम्मेदारियाँ बोझ बन जाएँगी। पर याद रखना, तुम्हारे हर कदम पर हमारी दुआएँ और आशीर्वाद एक अदृश्य कवच बनकर तुम्हारे साथ रहेंगे। जब कभी मन उलझे, अकेलापन सताए, तो समझना कि हम दूर होकर भी तुम्हारे बेहद पास हैं।