हिन्दी से है मेरी पहचान

उषा शर्मा, प्रसिद्ध लेखिका, जामनगर, गुजरात

हिन्दी से है मेरी पहचान,
काव्य सृजन कर ही नित पाऊँ सम्मान।
दोहे, छंद, चौपाई, सोरठे—
समृद्ध गद्य-साहित्य है संपूर्ण अभिमान।

हिन्दी तो हमारी मधुर भाषा,
सबके जीवन में अपनत्व जगाती।
ब्रह्म चेतना और त्रिभुवन का
हमको जीवनभर यही ज्ञान कराती।

परमपिता ब्रह्माजी की बाह्मी लिपि से जन्मी,
हिन्दी बहुत पुरानी।
हिन्दी भाषा ही हमको ग्रंथों में कहती,
सृष्टि की समस्त कहानी।

सरस्वती वीणा के झंकारों में झंकृत,
हिन्दी का नाद ही मुखरित।
देवों की वाणी संस्कृत है,
हिन्दी भाषांतरित संस्कारों में प्रचलित।

आओ! हिन्दी से स्नेह अपार करें,
यही स्नेह सद्गुण का प्रतिबिंब भी।
मृदु व्यवहार दर्शाती हमारी भाषा हिन्दी,
ये विश्व-कुटुंब की परिभाषा।

क्यों ना हम निःसंकोच, निर्विघ्नं
उपयोग कर हिन्दी में काम करें।
सम्पूर्ण राष्ट्र का स्वप्न यही,
हिन्दी विश्व में हमारी राष्ट्रीय भाषा बनें।

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