
डॉ. शशिकला पटेल असिस्टेंट प्रोफेसर मुंबई
शब्दों में है मिठास, सुरों में है कमाल,
आ गया हिंदी दिवस, मचा बड़ा धमाल।
अंग्रेज़ी के युग में, हिंदी को बचाना है,
अब तो सबको हिंदी में बातें सिखाना है।
कुछ बोले “Hello”, तो कुछ बोले “Hi”,
किसी ने बोला “कैसे हो भाई?”
लेकिन आज के दिन, बदलेंगे ये रिवाज़,
हिंदी में कहेंगे, “नमस्ते! क्या हालचाल?”
चाय की दुकान पर भी चर्चा हो गंभीर,
“इंजीनियरिंग” कैसे बोलें, हिंदी में ये चीज़?
“यार, इंजीनियरिंग को ‘अभियंत्रिकी’ बोलते हैं”,
कहते ही दोस्त ने पकड़ा सर और बोला, “कब होश में आएंगे?”
बॉस ने कहा, “रिपोर्ट तैयार करो, हिंदी में आज”,
कर्मचारी बोला, “सर, दिमाग न करिए ख़राब।
अंग्रेज़ी में लिखना तो है बस की बात,
हिंदी में लिखेंगे तो होगा काम का सत्यानाश!”
पर हिंदी दिवस पर सब ने ठाना,
हिंदी से नहीं होगा अब कोई अंजाना।
तो दोस्तों, चलो इस दिन को मनाएं,
हिंदी में हँसी-मज़ाक और ठहाके लगाएं।
क्योंकि हिंदी है अपनी प्यारी ज़बान,
इसमें ही छुपा है, दिल का सारा मान।
तो हिंदी दिवस पर सबको ये समझाएं,
हिंदी बोलें, और इसे दिल से अपनाएं!