
मधु चौधरी, लेखिका, बोरीवली (मुंबई)
हर सांचे में ढलने का हुनर रखती हूं
कहर बरपा हो तो भी साथ निभाने का
हुनर रखती हूं
फेरों का हो या ना हो बंधन
वादे करके निभाने का
हुनर रखती हूं
तेरे दुख में , तू ना डूबे
यह भी हुनर रखती हूं
तेरे सुख में , तू ना बहके
यह भी हुनर रखती हूं
बस परखना ना तुम मेरी
वफादारी के जज्बे को,
साथ में होते हुए भी ,
साथ छोड़ने का
भी हुनर रखती हूं।
वाह वाह ❤️
एक शानदार अभिव्यक्ति
इतने कम शब्दों में इतना कुछ कह देने का हुनर भी आप में ही है..!!
अवर्णनीय …..!!
आभार रेनू एवं अलका।
सुंदर लेखन के लिए बहुत बहुत बधाई ।
Bahut khoobsurat n very expressive in limited words