
शोभा सोनी, कवयित्री, बड़वानी (मध्यप्रदेश)
रिमझिम-रिमझिम बरसे बदरा,
छम-छम, छम-छम नाचे मयूरा।
दम-दम दमके दमक दामिनी,
देखो बच्चों लौट आई सावनी।
पूड़ी-कचौड़ी और पकोड़ी,
साथ में रख लो चटनी थोड़ी।
चलो झरनों पे घूम के आएं,
झूमें-नाचें, मिल के मौज मनाएं।
लहरा रही हैं खेतों की फसलें,
देख गुलों को दिल ये मचले।
नीम-बरगद पे तन गए झूले,
झूल-झूल सब आनंद में फूले।
भिनी-भिनी मिट्टी की महक,
पंछियों की ये मधुरम चहक।
छवि प्रकृति की लगे मनभावन,
सबके हृदय को भाया सावन।
सावन पर बढ़िया रचना बधाई