संस्कृत – सभी भाषाओं की जननी

संस्कृत भारती द्वारा संभाषण शिविर का सफल आयोजन

मुंबई से रेणु परसरामपुरिया की रिपोर्ट

मुंबई, संस्कृत भारती संस्था के कोंकण प्रांत के मार्वे-दिंडोशी जनपद की ओर से मुंबई के मलाड (सुन्दर नगर) में १० दिवसीय संस्कृत संभाषण शिविर का सफल आयोजन किया गया। यह शिविर ६ अक्टूबर से १५ अक्टूबर तक चला, जिसमें विभिन्न आयु वर्ग, जाति एवं धर्म के लोगों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।

इस निःशुल्क शिविर का उद्देश्य संस्कृत भाषा को जन-जन तक पहुंचाना था। संस्कृत भारती की सहमंत्री श्रीमती मीनल म्हात्रे ने अध्यापिका के रूप में अत्यंत सरल एवं रोचक शैली में प्रतिभागियों को संस्कृत बोलचाल सिखाई। विशेष बात यह रही कि शिविर में भाग लेने के लिए संस्कृत का पूर्व ज्ञान आवश्यक नहीं था। पहले ही दिन से प्रतिभागियों को संस्कृत में वार्तालाप के लिए प्रेरित किया गया।

शिविर को विदेश में रह रहे पी. एस. जी. कृष्णन का मार्गदर्शन प्राप्त हुआ। लगभग दो घंटे प्रतिदिन चलने वाले इस शिविर में कुसुम चौमाल, मनीषा भाटिया, सारिका फुरिया, पूनम शर्मा, पुष्पा सेल्वराजन, रोहिणी भीसे, कोस्तुभ भीसे, सोनल वगडिया, नयना पांचाल, सविता बोरकर, स. ल. अभयंकर, गीता, जीया लुथरिया, नयना खरोटे, सरिता, सुजाता, तृप्ति कदव, भगवती याग्निक, साक्षी, रेणू परसरामपुरिया आदि विद्यार्थियों ने सक्रिय रूप से सहभागिता की।

श्रीमती म्हात्रे के समर्पण और निस्वार्थ सेवा भाव से विद्यार्थियों ने दस दिनों में ही संस्कृत भाषा के मूलभूत प्रयोग सीख लिए। शिविर के समापन अवसर पर एक सुंदर सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित थे किरण मोटानी (संस्कृत भारती बोरीवली जनपद प्रमुख), श्रीमती जयश्री नायर (सं. भा. ओशिवरा जनपद मंत्री),मुकेश चौरसिया (शक्ति संघ कोषाध्यक्ष) तथा अशोक गोयल (शक्ति संघ समिति सदस्य)। कार्यक्रम का संचालन सरिता जी ने किया।

समापन समारोह में विद्यार्थियों ने संस्कृत में विविध प्रस्तुतियां दीं — किसी ने स्वयं का परिचय दिया, किसी ने दिनचर्या सुनाई, तो किसी ने चाय बनाने की प्रक्रिया बताई। एक छात्रा ने प्रसिद्ध फिल्म शोले के संवादों को संस्कृत में रूपांतरित कर नाटक के रूप में प्रस्तुत किया, जिसे खूब सराहा गया। अंत में अतिथियों ने सभी विद्यार्थियों की हौसला-अफजाई करते हुए संस्कृत भारती के कार्यों की प्रशंसा की।संस्कृत भारती संस्था, जिसकी स्थापना वर्ष १९८१ में हुई थी, एक गैर-लाभकारी संगठन है। इसका मुख्यालय दिल्ली में स्थित है तथा इसके कार्यकर्ता पूरे देश में निःस्वार्थ भाव से संस्कृत भाषा को घर-घर पहुंचाने का कार्य कर रहे हैं। हाल ही में संस्कृत भारती (विदर्भ) ट्रस्ट ने प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी को ‘उद्गार’ नामक पुस्तक भेंट की, जिस पर प्रधानमंत्री ने संस्था के प्रयासों की सराहना की और संस्कृत को जनभाषा बनाने के उनके मिशन की प्रशंसा की।

8 thoughts on “संस्कृत – सभी भाषाओं की जननी

  1. बहुत बढ़िया रेनू, आपने अत्यंत प्रभावकारी जानकारी हम सबके साथ साझा की ।

    1. रेणू भगिनी
      नमो नमः
      बहु सम्यक वार्ता विवरण।
      I missed last day program.Nice to meet you all.
      धन्यवाद:

  2. नमो नमः रेणु भगिनि। विवरणपत्र सम्यक् लिखितमस्ति । धन्यवादाः भगिनि।

      1. रेणू भगिनी
        नमो नमः
        बहु सम्यक वार्ता विवरण।
        I missed last day program.Nice to meet you all.
        धन्यवाद:

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