बंधन प्यार का

अविनाश खरे ,पुणे

आज मंगल कार्यालय में शहनाई के सुमधुर स्वर गूंज रहे थे. मेहमानों का आना शुरू हो चुका था. शादी में रिश्तेदारों, मित्रों और परिचितों को निमंत्रण दिया गया था.रात को विवाह संपन्न हुआ. सभी मेहमान भोजन करके विदा हो गए. अब घर के सदस्य आपस में बातें कर रहे थे.

सबके भोजन के बाद हॉल और केटरिंग का बिल चुकाया गया और फिर घर की नई बहू समृद्धि का गृह प्रवेश कराया गया. राहुल ने समृद्धि को उपहार में हीरे का सेट दिया था. यह भेंट देखकर वह बेहद खुश थी.समृद्धि को सब कुछ किसी सपने जैसा लग रहा था. ससुराल उसे बहुत अच्छा मिला था और साथ ही दिल से प्रेम करने वाला पति भी. वह खुद को बेहद भाग्यशाली समझ रही थी. राहुल भी समृद्धि से विवाह होने पर बहुत प्रसन्न दिखाई दे रहा था.

सुबह की सुनहरी किरणें गुलाबी पर्दों के पीछे से समृद्धि की आंखों पर पड़ीं तो उसके हाथों में पहनी हरी चूड़ियां खनक उठीं. सासू मां ने मुंह दिखाई में उसे कानों के सोने के झुमके और बनारसी साड़ी भेंट की थी. उन्हें देखकर वह खुशी से झूम उठी.तभी उसकी नजर पड़ी कि रसोई से राहुल गरमा-गरम चाय लेकर आ रहा था. उसने चाय देते हुए मुस्कराकर कहा, “लीजिए रानी सरकार, सिर्फ आपके लिए.” चाय की वह मोहब्बत भरी प्याली देते ही घर के सभी सदस्य वहां आ गए और हंसते हुए बोले, “अरे बेटी, शर्माओ मत, यह तो स्पेशल चाय है.”तीन साल की मासूम अंजली एक प्लेट में पारले-जी के बिस्कुट लेकर दादी के पास खड़ी थी. राहुल की बेटी बहुत सुंदर थी, बिल्कुल अपनी मां की तरह. उसकी आंखें भी मां जैसी ही थीं. राहुल ने उसे गोद में उठा लिया.

कामिनी, राहुल की पहली पत्नी, दो साल पहले बीमारी के कारण चल बसी थी. इसके बाद राहुल ने ही अंजली की बड़े प्यार से परवरिश की. जब भी राहुल समृद्धि से मिलता, अंजली की बातें जरूर करता. वह कभी मोबाइल पर संदेश भेजता तो कभी दिन में एक बार वीडियो कॉल करता. शादी से पहले दोनों साथ होटल में खाना खाने जाते थे. कब दोनों एक-दूसरे के इतने करीब आ गए, उन्हें खुद भी पता नहीं चला.

समृद्धि को पहले से मालूम था कि राहुल विवाहित है और एक बेटी का पिता भी, लेकिन यह बंधन प्यार का था. अब समृद्धि के सामने एक नई चुनौती थी. उसके घरवाले इस शादी से नाराज थे, फिर भी उसने राहुल से विवाह किया. वैवाहिक जीवन की शुरुआत हो चुकी थी.जब राहुल समृद्धि को गले लगा रहा था, तभी उसकी बेटी अंजली वहां आई, समृद्धि की साड़ी खींची और प्यार से “मां” कहकर पुकारा. उसकी मुस्कान देखकर समृद्धि ने उसे गोद में उठाकर स्नेह से चूम लिया. राहुल ने भी समृद्धि के कंधे पर हाथ रख दिया.आज से एक नए रिश्ते की शुरुआत हुई थी. अब चाहे जिंदगी में कितने ही संकट क्यों न आएं, वे इस प्यार के बंधन को पूरी निष्ठा से निभाएंगे.

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