जीत

मीनू राजेश शर्मा, प्रसिद्ध लेखिका, रायपुर

जिसमें हारने का जज़्बा होता है,
उसकी जीत निश्चित होती है।
जो विपरीत परिस्थितियों में भी अपना संयम नहीं खोता,
उसकी जीत निश्चित होती है।

आज रास्ता बना लिया है,
तो कल मंज़िल भी मिल जाएगी।
हौसलों से भरी कोशिश
एक दिन ज़रूर रंग लाएगी।

तिलचट्टा बार-बार पेड़ों पर चढ़ता है,
वह गिरता है,
पर चढ़ना नहीं छोड़ता
और अंततः अपनी मंज़िल पा ही लेता है।

हमें भी हारकर मायूस नहीं होना चाहिए,
जीत के पथ पर निरंतर अग्रसर रहना चाहिए।
हमें हमारी मंज़िल ज़रूर मिलेगी।

जो रोशनी की राहों में दिए जलाते हैं तो क्या,
जो घनघोर अंधेरों में
तूफ़ानों से लड़कर भी
अपनी लौ जलाए रखें
उस दीए की जीत निश्चित है।

संगमरमर से बनी मूरत सुंदर होगी ही,
क्योंकि संगमरमर स्वयं सुंदर होता है,
पर जो सामान्य पत्थर से सुंदर मूरत बनाए
तारीफ़ तो उस शिल्पकार की है।

किनारे पर खड़े रहने से समंदर पार नहीं होता,
नभ को निहारने से चाँद-तारे नहीं मिलते।

तोड़ो सीमाएँ, खुद को काबिल करो,
ताक़त दो, पंख खोलो और उड़ान भरो।
खुद से जीतने की ज़िद ही
तुम्हें भीड़ में आगे ले जाएगी।

तुम्हारा आत्मविश्वास ही
तुम्हें जीत दिलाएगा।
जो बार-बार गिरकर संभलता है,
वही तो इतिहास रचता है।

असफलता एक चुनौती है इसे स्वीकार करो,
क्या कमी रह गई, यह सोचो और सुधार करो।
जब तक सफल न हो,
नींद-चैन को त्यागो,
संघर्ष का मैदान छोड़कर मत भागो तुम।

कुछ किए बिना जय-जयकार नहीं होती,
कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती।

सिंधु में गोताखोर
बार-बार डुबकी लगाता है,
पर हर बार मोती नहीं मिलता।

लक्ष्य को साधो, फिर तीर चलाओ
सफलता तुम्हें ज़रूर मिलेगी।

विधाता की अदालत में
वकालत बड़ी प्यारी है,
ख़ामोश रहिए, कर्म कीजिए
वहाँ सबका मुक़दमा जारी है।

हमें हमारी मंज़िल ज़रूर मिलेगी,
क्योंकि हमारी कोशिश जारी है।

2 thoughts on “जीत

  1. सामान्य को खास बनाना यह सबसे खास बात है सुंदर संदेश

  2. आपकी कविता से हम सबको मनोबल मिलेगा जीत की राह में अग्रसर होने का ।बहुत सुंदर रचना

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