आओ ज़रा जी लें

शारदा कनोरिया शुभा, प्रसिद्ध लेखिका, पुणे

आओ, नीरसता में
कोई रस का संचार करें।
ओठों को खुलने दें,
कंठों से मधुर राग करें।

कब तक यूँ उदासियों
को अपनाएँगे?
चलो खुलकर जी लें
उन लम्हों को।

जो हमारी यादों में
मुस्कुराते हैं,
जो बिखरकर खूबसूरती
की बूँदें बरसाते हैं।

वही लम्हे तो हैं
जो दिल में उतरकर
अपनी अमिट जगह
बना लेते हैं।

जो वर्तमान की उदासी में
मौसम बदल देते हैं,
राहत की ठंडी हवा बनकर
मन को सहला जाते हैं।

ये खूबसूरत लम्हे
हर मुसीबत में भी
चेहरे पर मुस्कान
सजा ही देते हैं।

कितने अद्भुत,
कितने लाजवाब
इन लम्हों का नहीं
कोई जवाब।

लम्हे एक कविता हैं,
जो मानव जीवन की
महाकाव्य रचना में
नए छंद जोड़ते जाते हैं।

भावों को स्वर और
ताल से
बांधते जाते हैं।
तो जियो यूँ कि

हर पल खुद में एक
उत्सव बन जाए,
हर लम्हा खिलखिलाता,
खुशनुमा जीवन बन जाए।

2 thoughts on “आओ ज़रा जी लें

  1. यह छोटे से गाँव की कहानी sweta बेटी बहुत ही छोटी उड़ान से आसमान की ऊचाईयां छुएगा लाख लाख बधाई एवं शुभकामनाएं मेरी ओर से 🌹⚘️👍🙏

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *