साथ चल,साथ चल।
मेरे साथ-साथ चल।
वक्त के तू हमसफ़र।
थोडी दूर साथ चल।
आज चल कल चल।
रोज मेरे साथ चल।
रास्ते के कूच पर।
थोड़ी दूर साथ चल।
साथ पाके साथियो का।
साथियो के साथ चल।
दूर का बहाना कैसा।
थोड़ी दूर साथ चल।
रोज नही,आज नही।
एक बार साथ चल।
वक्त का बहाना कैसा।
थोड़ी दूर साथ चल।
टूट कर बिखर गया।
एक ख्वाब रात का।
बादा कैसे आज करू।
थोड़ी दूर साथ चल।
तेरा जिगर मेरा कैसा।
सोचकर तू साथ चल।
तेरा प्यार एक धोखा।
थोड़ी दूर साथ चल।
आज भीड लग गई।
साथ तेरा देखने को।
तेरे बिन जमाना हंसे।
थोड़ी दूर साथ चल।
जिस्म की नुमाइश सजी।
दौर रील का चला।
हम अकेले तुम अकेले।
थोड़ी दूर साथ चल।
भूल हुई बात गई।
छोड़ो यार आज तुम।
प्यार अब मचल रहा।
थोड़ी दूर साथ चल।
नीद आखो मे नही।
सभी जागे देर तक।
आख खुली नीद लगी।
थोड़ी दूर साथ चल।

एड. अमरसिंह, शिकोहाबाद, फिरोजाबाद
भावपूर्ण सृजन