इश्क कीजिए

सूर्यास्त की हल्की सुनहरी रोशनी में खड़ा एक युवा दर्पण में मुस्कुराते हुए स्वयं को निहारता हुआ, प्रेम और आत्मविश्वास का प्रतीक

पूनम शर्मा स्नेहिल, प्रसिद्ध कवयित्री, जमशेदपुर

गर दिल उदास है इश्क कीजिए।
किसी की तलाश है इश्क कीजिए।।

जी यादों में दे रहा है दस्तक कोई।
रहता कोई आसपास है इश्क कीजिए।।

नजर मिली और दिल पड़ गया सच में।
लग रहा कोई खास है इश्क कीजिए।।

बहुत कुछ सोचने की जरूरत नहीं है।
यह खूबसूरत अहसास है इश्क कीजिए।।

दिया है दर्द किसी ने दिल को बहुत।
और ये दिल हतास है इश्क कीजिए।।

कि दर्पण में खुद को देखकर निहारत हो बार – बार।
हुआ ये सब अनायास है इश्क कीजिए।।

“नेह” नहीं जरूरत हर दफा इश्क में दूसरे की।
अगर खुद पर विश्वास है इश्क कीजिए।।

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