
संध्या दीक्षित
सपने ही हमारे अपने होते हैं। उन्हें देखें, उन्हें जिएँ, और हो सके तो उन्हें हर पल अपनी भावनाओं से पोषित करें। उन्हें अपने पुरुषार्थ से सींचें, और कर्म की हथौड़ी से समय–समय पर उन्हें धारदार बनाते रहें।
सदा याद रखें सपने ही जीवन की ऊर्जा हैं। ऊर्जा है तो जीवन गतिमान है; अन्यथा ठहरा हुआ पानी भी धीरे-धीरे मृतप्राय हो जाता है, जो केवल कंकड़-पत्थर मारने पर ही हिलता है।सपने हमें दिशा और दशा–बोध देते हैं। प्रयास करने पर वे हमें शोहरत की बुलंदी और आसमान की ऊँचाई तक पहुँचा सकते हैं। सच तो यही हैसपने ही हमारे मन में बसते हैं।