
-सुनीता मलिक सोलंकी, प्रसिद्ध लेखिका
नयनों में आ जाता पल में बीता हुआ अतीत,
अधरों पर आते पल भर में भूले-बिसरे गीत।
एक-एक याद उभर आती,
कभी भूल सब खो सी जाती।।
हमदर्द यहाँ कौन किसी का,
जब खुद में ताकत न होती।
मगर भुलाए नहीं भूलती मैं तुमको, मनमीत,
नयनों में आ जाता पल में बीता हुआ अतीत।।
ऐ स्मृतियों की बाढ़, मुझे तुम
अब कहाँ बहा ले जाती हो?
पीछे छूटे सपने सलौने,
अब क्यों आ याद दिलाती हो।।
आज अकेले नहीं किसी को मैं पाऊँगी जीत,
नयनों में आ जाता पल में बीता हुआ अतीत।।
तुम प्रेम मेरे, तुम प्रेम हो,
तुम्हें देख छाए तरुणाई।
हर ओर तुम्हें ही तलाशती,
तुमको देख-देख मुस्काई।
जनम-जनम की मेरे साजन, मेरी तुमसे प्रीत,
नयनों में आ जाता पल में बीता हुआ अतीत।।