
सुरेश परिहार, संपादक, लाइव वॉयर न्यूज
लोग अक्सर कहते हैंमाँ तो माँ होती ही है.लेकिन मेरा मानना है कि माँ ही माँ होती है.
माँ पर न जाने कितने गीत लिखे गए, कितनी ़िफल्में बनीं, कितने व्हाट्सऐप संदेश गढ़े गए. मदर्स डे मनाया गया. फिर भी लगता है. माँ के बारे में जितना लिखा जाए, कहा जाए, गाया जाए सब कम है. शब्द थक जाते हैं, लेकिन माँ नहीं. कवियों ने माँ को अनगिनत उपमाएँ दी हैं. हमारे प्रसिद्ध कवि स्व.ओम व्यास ओम ने माँ को संवेदना कहा, भावना कहा, अहसास कहा, लोरी कहा, पूजा की थाली कहा, गालों की पप्पी कहा, मेहंदी-हल्दी-कुमकुम कहा. सच ही तो ह. इस दुनिया की हर चीज़ में कहीं न कहीं माँ बसती है.
आप किसी भी वस्तु को उठाकर देखिए. चिमटा हो, गिलास हो, कटोरी हो या थाली अगर ध्यान से देखें, तो उसमें भी माँ नज़र आ जाएगी. हर चीज़ किसी न किसी रूप में माँ जैसी ही होती हैकाम आती हुई, चुपचाप, बिना शिकायत. आज के समय में मोबाइल को ही देख लीजिए. हम उसके बिना रह नहीं पाते. वह भी माँ की तरह ही हैचौबीस घंटे साथ. कहीं भी, कभी भी, जो चाहिए, वह उसके पास है. सुबह जगाने के लिए अलार्म, भजन सुनने के लिए प्रभाती, दवा खाने और पानी पीने तक की याद दिलाने वाला मोबाइलक्या यह माँ से कम है?
भूख लगे तो फूड डिलिवरी ऐप, परेशानी हो तो समाधान, सवाल हो तो जवाबसब कुछ मोबाइल में. कई बार तो लगता है, माँ मोबाइल है या मोबाइल ही माँ है.
व्हाट्सऐप माँ की तरह रिश्तों की खबर देता हैकौन बीमार है, कौन आया, कौन गया. फेसबुक ऐसा है जैसे माँ के पास बैठकर दिल की बात कहना. इंस्टाग्राम की रील्स भी माँ की सीख जैसी हैं. कम शब्दों में बहुत कुछ समझा देती हैं. माँ भी मोबाइल की तरह ही होती है. दिन-रात काम करते-करते थक जाती है. कभी-कभी वह भी हैंग हो जाती है. उसके पास कहने को बहुत कुछ होता हैयादों की एक पूरी गैलरी. जब वह गैलरी भर जाती है, जब कोई सुनने वाला नहीं होता, तो वह चुप हो जाती है, बीमार पड़ जाती है.
जब आप बैठकर उसकी बातें सुन लेते हैं, उसकी यादों का इनबॉक्स हल्का कर देते हैं, तो वह फिर से जीवंत हो उठती हैफिर से एक्टिव. माँ को भी मोबाइल की तरह सुरक्षा चाहिए. एक कवर, थोड़ा ध्यान, थोड़ा समय. उसे धूल, धूप, धुएँ और बारिश से बचाना चाहिए. क्योंकि माँ और मोबाइलदोनों साथ हों, तभी जीवन सुचारु चलता है.
हम मोबाइल खराब हो जाए तो तुरंत रिपेयरिंग वाले के पास ले जाते हैं, ताकि वह फिर से ठीक से काम करने लगे. माँ बीमार हो जाए तो भी डॉक्टर के पास ले जाते हैंलेकिन कहीं न कहीं मन में यह रहता है कि वह जल्दी ठीक हो जाए, ताकि फिर से सब संभाल ले.
पर सच यह है कि एक दिन मोबाइल और माँदोनों ही लगातार काम करते-करते आउट ऑफ ऑर्डर हो जाते हैं.़ फर्क सिर्फ इतना है-मोबाइल चला जाए तो नया आ जाता है.
पुराने मोबाइल की एक्सेसरी नए में काम नहीं आती.
लेकिन माँ
माँ की दी हुई संस्कारों की एक्सेसरी,
उसकी सीख,उसकी ममता,उसका साया ज़िंदगी भर काम आता है.
माँ तो माँ होती है…
..और माँ ही माँ होती है.
किसी भी उम्र का बच्चा मां के बिना नहीं रह सकता। मां हमें सब कुछ सिखाती है लेकिन उसके बिना कैसे रहना है बस यही नहीं सिखाती….
सच में माँ के होने का एहसास उन हर वो जगह वस्तु में घर का हर कोना मां के होने का एहसास। कराता है । माँ के बारे में लिखना चाहो तो शब्द ही कम पड़ जाते हैं।
सच में माँ के होने का एहसास उन हर वो जगह वस्तु में घर का हर कोना मां के होने का एहसास। कराता है । माँ के बारे में लिखना चाहो तो शब्द ही कम पड़ जाते हैं।
Maa ek esa naam iske aage aur kuch hai hi nahi .maa wo shakti hai jiske aage bhagwan bh shish jhukate hai . Kisi bhi umar me ho maa ka saya jaruri hai . Jub meri maa mujhe kahti hai ki me na rahungi to yad karoge wo baat sochne se bhi dar lagta hai . Maa ke liye jitna likho kum hai
Nice
मां तेरा आचँल मेरा संसार है
तू ही मेरी माँझी तू पतवार है
🙏🙏🙏🙏🙏