
नमिता गुप्ता ‘श्री’ लखनऊ (उ.प्र)
दास्तान ए जिंदगी !!
दास्तान ए जिंदगी ,आँखों से लिखी जाएगी।
सुरमई काजल सी बहती, एक नदी जाएगी।।
जज्बात की अपनी बयानी ,है अपनी दास्ता।
हर सफा़ स्याही नहीं ,खूँ की जुबानी जाएगी।।
चाँद को तुम रखना ,दिल में हिफाज़त से।
शबनमी आगोश में,चाँदनी शरमाई जाएगी।।
सूनी रात सूने सपने, सूनी कहानी हो गई।
सहमी सूनी ये गलियाँ,रात विरानी जाएगी।।
मुस्कुराहट आपकी ,सितम ढा रही गजब का।
धडकनों में प्यार की ,अजब रवानी जाएगी।।
क्या है कैसे हुआ ,और क्या कहती फिजा।
कुंडली इश्क की,महफिल खंगाली जाएगी।।