
चन्द्रवती दीक्षित, करनाल ( हरियाणा)
जीवन एक संगीत है,
यह तो है जीने की कला।
कोशिश करे सदा करिश्मा,
परहित में आनंद भला।
जिसने समझा गीता-ज्ञान,
हो गया हर भव से पार।
प्रीत की खिले फूलवारी,
मज़बूत हो जीवन-आधार।
सुख-दुःख ज़िंदगी के रंग,
नित बदलते रहते हैं।
संयम-विश्वास की जड़ें हरी,
जिनमें हर कण चहकते हैं।
स्वयं को परखने पर ही,
ठीक-गलत का हो अनुमान।
सत्यमेव का कर आलिंगन,
वतन की बने पहचान।
आशा के जहाँ दीप जलें,
हर बाधा से पाएँ पार।
ईर्ष्या, लोभ, खालीपन से बचें,
सुखी होगा घर-संसार।
मुश्किल से मिलता यह जीवन,
वैर-भाव मत पाल।
पल में प्रलय हो जाती है,
सजा लें ममता का थाल।
पशु-पक्षी, जीवन असंख्य,
संतुष्टि में रहते मग्न।
जिसने खुद को साध लिया,
खिला दिया संगीतमय चमन।