
सुरभि डागर, प्रसिद्ध लेखिका, बिजनौर
कुछ नहीं, बस एक दुआ
लिख रही हूँ।
एक माँ हूँ तेरे लिए,
खुशियों भरा जीवन
लिख रही हूँ।
अपना सुख छोड़कर मैं
तेरा सुख लिख रही हूँ।
अपने लिए और उम्र नहीं,
तेरे लिए लंबी आयु
लिख रही हूँ।
तेरे लिए मैं दुआ लिख रही हूँ।
अंधकार से लड़कर
तेरे लिए झिलमिलाता जीवन
लिख रही हूँ।
कुछ नहीं, बस एक दुआ
लिख रही हूँ।
हटा रही हूँ बबूल राहों से,
मैं कदम के वृक्ष
लिख रही हूँ।
बैठो सदा कदम की छाँव में,
तेरा साथी केसरी नंद
लिख रही हूँ।
कुछ नहीं, बस एक दुआ
लिख रही हूँ।
माँ के दिल से निकली बहुत सुंदर दुआ है। बधाई व शुभकामनाएंँ 💐🥰
आपका हार्दिक आभार।
सुन्दर रचना